बोरे बासी छत्तीसगढ़ की खानपान की परंपरा का अटूट हिस्सा- कलेक्टर

जांजगीर चाम्पा-श्रमिक दिवस पर कलेक्टर ने
बोरे बासी के साथ खाया चटनी, बिजौरी अऊ खेढा का साग,

श्रम दिवस पर दी मजदूरों को बधाई और शुभकामनाएं,


कलेक्टर श्री जितेन्द्र कुमार शुक्ला ने मजदूर दिवस पर आज पोषक तत्वों से भरपूर बासी खाकर छत्तीसगढ़ी खानपान की संस्कृतिक परंपरा ,की महत्ता प्रतिपादित की।
उन्होंने कहा कि बोरे बासी खाने के बाद शरीर उर्जित हो जाता है।
ब्यक्ती शारीरिक, मानसिक श्रम के लिए तैयार हो जाता है।
उन्होंने कहा कि बोरे बासी न केवल हमारे शरीर को संतुलित पोषण देता है बल्कि यह शरीर की जरूरत के मुताबिक पानी का संतुलन बनाए रखता है। गर्मी के मौसम में बोरे बासी का अपना अलग महत्व है। यह डिहाइड्रेशन के लिए प्रतिरोधक का काम करता है।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के आह्वान पर श्रमिकों के सम्मान में आज जांजगीर चांपा जिले में श्रमिक दिवस पर कलेक्टर श्री जितेन्द्र कुमार शुक्ला सहित जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री गजेन्द्र सिंह ठाकुर, जिला खेल अधिकारी श्री बैस सहित अन्य विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों ने बोरे बासी खाकर ख़ान पान के छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक गौरव और स्वाभिमान के महत्व का आम लोगों को संदेश दिया। कलेक्टर ने श्रम दिवस पर ज़िले के सभी श्रमिक भाइयों को अपनी बधाई और शुभकामनाएं दी।
छत्तीसगढ़ में खान-पान का बासी एक अहम हिस्सा है।छत्तीसगढ़ में बासी को मुख्य आहार माना जाता है। बासी का सेवन समाज के हर तबके के लोग करते हैं। रात के बचे भात को पानी में डूबाकर रख देना और उसे नाश्ता के तौर पर या दोपहर के खाने के समय इसका सेवन किया जता है। विशेषकर गर्मी के मौसम में बोरे और बासी को लोग खाना पसंद करते हैं।
पानी की ज्यादा मात्रा होने के कारण मूत्र उत्सर्जन क्रिया नियंत्रित रहती है। इससे उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है। बासी पाचन क्रिया को नियंत्रित रखता है। गैस या कब्ज की समस्या में यह रामबाण औषधि का काम करता है। बासी एक प्रकार से डाइयूरेटिक का काम करता है। बासी का सेवन अनिद्रा से भी बचाता है। बासी में संपूर्ण पोषक तत्वों का समावेश रहता है।

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